SURGUJA DISTRICT

स्थिति

इस जिले का अक्षांशिय विस्तार 230 37' 25" से 240 6' 17" उत्तरी अक्षांश और देशांतरिय विस्तार 810 37' 25" से 840 4' 40" पूर्व देशांतर तक है। यह जिला भौतिक संरचना के रुप से विंध्याचल-बघेलखंड और छोटा नागपुर का अभिन्न अंग है। इस जिले की समुद्र सतह से उंचाई लगभग 609 मीटर है।

स्थापना

इस जिले की स्थापना 1 जनवरी 1948 को हुआ था जो 1 नवम्बर 1956 को मध्यप्रदेश राज्य के निर्माण के तहत मध्यप्रदेश में शामिल कर दिया गया। उसके बाद 25 मई 1998 को इस जिले का प्रथम प्रशासनिक विभाजन करके कोरिया जिला बनाया गया। जिसके बाद वर्तमान सरगुजा जिला का क्षेत्रफल 16359 वर्ग किलोमीटर है। 1 नवम्बर 2000 जब छत्तीसगढ राज्य मध्यप्रदेश से अलग हुआ तब सरगुजा जिले को छत्तीसगढ राज्य मे शामिल कर दिया गया। वर्तमान मे सरगुजा जिला पुनः दो और भागो मे विभक्त हो गया है जिसमे नये जिले के रुप मे जिला सुरजपुर और जिला बलरामपुर का निर्माण हुआ है।

नामकरण

सरगुजा के इतिहास से हमे यह पता चलता है कि सरगुजा कईं नामों से जाना जाता रहा है एक ओर जहां रामायण युग में इसे दंडकारण्य कहते थे वहीं दुसरी ओर दशवीं शताब्दी में इसे डांडोर के नाम से जाना जाता था। यह कहना कठिन है कि इस अंचल का नाम सरगुजा कब और क्यों पडा। वास्तव में सरगुजा किसी एक स्थान विशेष का नाम नहीं है बल्कि जिले के समूचे भू-भाग को ही सरगुजा कहा जाता है। प्राचिन मान्यताओ के अनुसार पूर्व काल में सरगुजा को निचे दिये गये नाम से जाना जाता था: • सुरगुजा - सुर + गजा - अर्थात देवताओं एवं हाथियों वाली धरती। • स्वर्गजा - स्वर्ग + जा - स्वर्ग के समान भू-प्रदेश • सुरगुंजा - सुर + गुंजा - आदिवासियों के लोकगीतों का मधुर गुंजन। वर्तमान में इस जिले को सरगुजा नाम से ही जाना जाता है। जिसका अंग्रेजी भाषा में उच्चारण आज भी SURGUJA ही हो रहा है।

कैसे पहुंचें

प्रकृति ने सरगुजा जिलें को विभिन्न प्रकार के वनों, सरोवरों, नदियों, पहाड इत्यादि से इस प्रकार परिपूर्ण किया है कि आप इस पावन धरती पर जरुर आना चाहेंगे। इसी धरती पर जहां एक ओर महाकवि कालीदास नें अपने सुप्रसिध महाकाव्य 'मेघदुत' की रचना की थी, वहीं दुसरी ओर भगवान राम, सीता माता और भाई लक्ष्मण सहित यहां वनवास के कुछ दिन काटे थे। सरगुजा जिला सडक एवं रेल मार्ग से सीधे जुडा हुआ है।
सडक मार्ग छत्तीसगढ राज्य में : रायपुर से अम्बिकापुर (जिला मुख्यालय) - 358 किमी • बिलासपुर से अम्बिकापुर- 230 किमी • रायगढ से अम्बिकापुर- 210 किमी • मध्यप्रदेश राज्य में: अनुपपुर से अम्बिकापुर - 205 किमी • उत्तरप्रदेश राज्य में: वाराणसी से अम्बिकापुर - 350 किमी • झारखंड राज्य में: रांची से अम्बिकापुर - 368 किमी • उडीसा राज्य में: झारसुगुडा से अम्बिकापुर- 415 किमी
रेल मार्ग सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर 03 जून 2006 से रेल मार्ग से जुड गया है। अम्बिकापुर शहर के मुख्य मार्ग देवीगंज रोड पर स्थित गांधी चौक से रेल्वे स्टेशन की दुरी लगभग 5 किमी है। यहां से टैम्पो, टैक्सी इत्यादी से अम्बिकापुर शहर आया जा सकता है। आप निम्न ट्रेंन रुट का प्रयोग अम्बिकापुर आने के लिये कर सकते है: • नई दिल्ली से अनुपपुर >> अनुपपुर से अम्बिकापुर • मुंबई से बिलासपुर >> बिलासपुर से अम्बिकापुर • चेन्नई से बिलासपुर >> बिलासपुर से अम्बिकापुर • कोलकाता से रायगढ >> रायगढ से अम्बिकापुर बिलासपुर से अम्बिकापुर आने के लिये बस और ट्रेंन दोनो का प्रयोग किया जा सकता है। बस अम्बिकापुर तक सीधे आती है जबकी ट्रेंन अनुपपुर (मध्यप्रदेश) होतें हुये अम्बिकापुर तक आती है। रायगढ से अम्बिकापुर आने के लिये बस की सुविधा ही उपलब्ध है।
वायु मार्ग: अम्बिकापुर सीधे आने के लिये वायु मार्ग उपलब्ध नहीं है, आप रायपुर तक देश के निम्न स्थानों से वायु मार्ग से आ सकते है, उसके बाद रायपुर से अम्बिकापुर आने के लिये बस का प्रयोग करना होगा: • नई दिल्ली से रायपुर • मुंबई से रायपुर • चेन्नई से रायपुर • कोलकाता से रायपुर • नागपुर से रायपुर • रांची से रायपुर